भीमा कोरेगांव हिंसा की घटना के सिलसिले में गिरफ्तार पांचों मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को घरों में ही नजरबंद रखने की अवधि सुप्रीम कोर्ट ने 4 हफ्ते और बढ़ा दी है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने SIT गठित करने की मांग अस्वीकार करते हुए पुणे पुलिस से आगे की जांच जारी रखने को कहा है।
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने फैसला दिया कि हैदराबाद में वामपंथी कार्यकर्ता और कवि वरवर राव, मुंबई में कार्यकर्ता वरनन गोन्जाल्विस और अरुण फरेरा, छत्तीसगढ़ में ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज और दिल्ली में रहने वाले गौतम नवलखा को जमानत नहीं दी जाएगी और अगले चार हफ्ते तक उन्हें घर में नजर बंद रखा जाएगा।
बता दें कि महाराष्ट्र पुलिस ने पिछले साल दिसंबर में आयोजित ऐलगार परिषद के बाद भीमा-कोरेगांव में हुई हिंसा की घटना में दर्ज प्राथमिकी की जांच के दौरान इन कार्यकर्ताओं को 28 अगस्त को गिरफ्तार किया था।
भीमा कोरेगांव केस: सुप्रीम कोर्ट ने कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी में हस्तक्षेप करने से किया इनकार
from Janta Ka Reporter
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