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भाजपा हमेशा से ही हुन्दुओं और किसानो को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करती आयी है। समय समय पर भाजपा किसी न किसी रूप में लोगो को फुसलाने की कोशिश करती है। और इस बार हद हो गयी है। भाजपा छोटे किसानो के खाते में सालाना 6000 रुपये डाल कर उनका वोट पाना चाहती है। अब यहाँ सवाल यह उठता है की क्या ऐसा करने से भाजपा भोले भाले किसानो को रिश्वत देने की कोशिश कर रही।

इस बार भी भाजपा ने किसानो को मदद्दे नजर रखते हुए उनके लिए एक नया प्लेन निकला है। जिसके अंतरगर्त किसानो के बैंक आकउंट में सालाना 6000 रुपये डाले जाएंगे। BJP सरकार ने दावा किया है की इससे किसानो समचुनाव स्या हल होगी और उन्हें अपने खेती में काफी मदद मिलेगी। परन्तु यह भी BJP का एक चुनावी स्टंट नजर आता है।

केंद्र सरकार लोकसभा चुनाव की घोषणा से पहले हाल में घोषित योजना प्रधानमंत्री पीएम-किसान के तहत दिए जाने वाले किसानों को दो किस्तों का भुगतान करने की तैयारी कर रही है। इससे किसानों के खाते में सीधे 4,000 रुपये आएंगे। यह जानकारी कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को दी है।

अंतरिम-बजट में, वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि यानी पीएम-किसान नामक प्रत्यक्ष आय सहायता योजना की घोषणा की। जिसके तहत लगभग 12 करोड़ छोटे किसानों को सालाना 6000 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाएगा। यह धन सीधे उनके बैंक खातों में तीन किश्तों में दिए जाएंगे। दो हेक्टेयर तक के खेत वाले किसान इसके हकदार होंगे।

गोयल ने यह भी बताया था कि यह योजना इसी वित्तीय वर्ष में एक दिसंबर 2018 से शुरू की जाएगी और मार्च 2019 तक आय सहायता की पहली 2,000 रुपये की किस्त का भुगतान कर दिया जाएगा। देखना यह है की क्या सच में भाजपा किसानो के हित में सोच रही है या फिर उनकी भावनाओ से सिर्फ वोट के लिए खिलवाड़ कर रही है।

अधिकारी ने बताया है की , राज्य सरकारें पात्र किसानों की पहचान करने की प्रक्रिया में हैं। उम्मीद है लाभार्थियों की प्रारंभिक सूची जल्द ही तैयार हो जाएगी। अधिकारी ने यह भी कहा कि कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे कई राज्यों ने भूमि रिकॉर्ड को डिजिटल कर दिया है। तेलंगाना, ओडिशा और झारखंड के पास भी आंकड़े हैं क्यों कि इन राज्यों ने भी इसी तरह की योजनाओं की घोषणा की है।

अधिकारी से यह सवाल पूछा गया कि क्या लोकसभा चुनाव से पहले दो किस्तें दी जाएंगी, तो इस बारे में अधिकारी ने कहा, हम इसके लिए तैयारी कर रहे हैं। हम लोकसभा चुनाव से पहले दो किस्तें हस्तांतरित करने के बारे में पूर्व अनुमान हैं जो मिलाकर 4,000 रुपये का होगा।

अधिकारी का कहना था कि चूंकि इस योजना को चालू वित्तवर्ष में लागू किया जा रहा है, इसलिए अगले महीने किसी भी समय आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद भी इसकी व्यवस्था प्रभावित नहीं होगी ।

परन्तु इस योजना में प्रधानमंत्री-किसान के दिशानिर्देशों सभी संस्थागत भूमि धारक, संवैधानिक पद रखने वाले, सभी सेवारत या या सरकारी अधिकारी, केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों के साथ-साथ सार्वजनिक क्षेत्र के ऊपरी क्रम यानी PASU , 10,000 रुपये से अधिक मासिक पेंशन पाने वाले सभी सेवानिवृत्त पेंशनभोगी, आयकर दाताओं तथा डॉक्टर एवं इंजीनियरों जैसे पेशेवरों को योजना से बाहर रखा गया है। मतलब यह की भाजपा सरकार सिर्फ छोटे किसानो को खरीदने की कोशिश कर रही है। भाजपा सरकार को पता है की उच्च क्रम के लोग उनकी बातो में नहीं आएंगे।

सरकार ने योजना के तहत लाभार्थियों की योग्यता का निर्धारण करने के लिए समयसीमा एक फरवरी, 2019 को निर्धारित किया है और इसके बाद अगले पांच वर्षों के लिए योजना के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

एक दिसंबर, 2018 और 31 जनवरी, 2019 के बीच स्थानांतरित की गई भूमि का स्वामित्व रखने वाले लोग इस योजना के तहत लाभ के प्राप्त करने के पात्र होंगे। हालांकि पहली किस्त हस्तांतरण की तारीख से आनुपातिक रूप से दी जाएगी।

देखना यह है की क्या किसानो को भाजपा सरकार के इस योजना का कोई लाभ मिलता है ? या फिर चुनाव ख़त्म होने के बाद फिर से छोटे किसानो को दर किनारा कर बड़े कारोबारियों को भाजपा बढ़ावा देगी।

The post किसान वोट को लुभाने के लिए भाजपा ने करी रिश्वत देने की कोशिश? appeared first on National Dastak.


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