
भारत में सभी नागरिकों को समानता का अधिकार दिया गया है। लेकिन आजादी के इतने वर्षों के बीत जाने के बाद भी हम ये वाक्य नहीं बोल सकते की सभी लोगो को सच में समानता का अधिकार है भी या नहीं। भारत का संविधान सभी नागरिको को बिना भेदभाव के समानता का अधिकार देता है।
लकिन इसके बाद भी आज भारतीय समाज में जाति आधारित भेदभाव किया जाता है जो की निंदनीय है। आज भी दलितों और नीचे जाति के लोगो के साथ होने वाले अन्याय देखा जा सकता है।
ऐसी ही एक घटना एक बार भी सामने आई है। घटना राजस्थान के जोधपर की है जहाँ एक स्कूल में, हाँ आपने सही सुना स्कूल में, जहाँ बच्चो को आयरन की गोली बाटी जा रही थी। उसी दौरान जब कुछ स्वर्णो बच्चो ने आयरन की गोलियां खाई तो उन्होंने लोटा उठाकर पानी पीया। लकिन जब दलित बच्चो की बारी आई तो उन्हें लोटा छूने नहीं दिया गया बल्कि उनके मुँह में ऊपर से पानी डाला गया। ये सारा वाकया प्रधानाध्यापक के सामने घटित हुआ।
इस सारे प्रकरण का वीडियो, हेडमास्टर के मोबाइल से एक बच्चे ने बना लिया। और सोशल ममीडिया पर इसे वायरल कर दिया। हालांकि दलित समाज ने प्रशासन व शिक्षा विभाग से इस मामले की जांच कराने और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग करी है।
वहीं गांव के पूर्व सरपंच बिरमाराम ने दलितों बच्चो के साथ हुई इस घटना के बारें में खेद जताते हुए इसे दलितों के साथ गौर अन्याय बताया।हालांकि स्कूल के प्रधानाध्यापक ने इस वीडियो को गलत बताया और साथ ही उन्होंने कहा की सोशल मीडिया पर गलत खबर फैलाई जा रही है।
इस घटना को लेकर धर्मेन्द्र कुमार जोशी जोधपुर के सरकारी प्रारम्भिक जिला शिक्षाअधिकारी ने दोषियों के खिलाफ उचित करवाई करने के भरोसा दिया है।
सवर्णो समाज के लोगो द्वारा दलितों के साथ जाति आधारित भेदभाव करना सवर्णो समाज की दलितों के प्रति ओछी मानसिकता को दिखाता है। लेकिन इस प्रकार की घटना का विद्यालय में बच्चों के साथ होना, हमें सोचने में मजबूर करता है की, क्या हमे सही में समानता अधिकार है? क्या हम वाकई में आजाद भारत का हिस्सा है?
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